ईरान के मिसाइल हमलों ने बढ़ाई मिडिल ईस्ट में अमेरिका की टेंशन

ईरान के मिसाइल हमलों ने बढ़ाई मिडिल ईस्ट में अमेरिका की टेंशन

ईरान ने एक बार फिर मिसाइलों का रुख मोड़कर दुनिया को हिला दिया है। ये सिर्फ बमबारी नहीं है। ये सीधा संदेश है। जब ईरान की मिसाइलें आसमान चीरती हुई निकलीं, तो वाशिंगटन के गलियारों में हलचल मच गई। पेंटागन अब हाथ पर हाथ रखकर बैठने के मूड में नहीं है। अमेरिका ने अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा है। ये स्थिति गंभीर है क्योंकि ये सिर्फ दो देशों की जंग नहीं है। ये पूरे मिडिल ईस्ट के नक्शे को बदलने वाली घटना बन सकती है। अमेरिका का अगला कदम क्या होगा? क्या हम एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की दहलीज पर खड़े हैं? सच तो ये है कि तनाव की ये आग अब काबू से बाहर होती दिख रही है।

ईरान का मिसाइल दांव और पेंटागन की तैयारी

ईरान की ओर से हालिया मिसाइल प्रक्षेपण ने साबित कर दिया कि वो पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। उसने दिखाया कि उसके पास लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों का जखीरा है। जवाब में अमेरिका ने भी अपनी चाल चल दी है। पेंटागन ने साफ कर दिया है कि उसके डिफेंस सिस्टम किसी भी हमले को नाकाम करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं। अमेरिकी नौसेना के जहाज भूमध्य सागर में अपनी पोजिशन ले चुके हैं। वहां तैनात गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर और पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं। ये कोई ड्रिल नहीं है। ये असल मोर्चाबंदी है।

पेंटागन के अधिकारी अब रात-दिन एक कर रहे हैं। उनका मानना है कि ईरान के हमले का मकसद सिर्फ डराना नहीं बल्कि इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाना था। अमेरिका ने अपने लड़ाकू विमानों की गश्त बढ़ा दी है। कतर और जॉर्डन जैसे देशों में स्थित अमेरिकी बेस अब रेड अलर्ट पर हैं। आपको ये समझना होगा कि अमेरिका के लिए ये सिर्फ अपने सहयोगी इजरायल को बचाना नहीं है। ये अपनी वैश्विक साख बचाने की लड़ाई भी है। अगर ईरान की मिसाइलें अमेरिकी सुरक्षा घेरे को भेद देती हैं, तो ये बाइडन प्रशासन के लिए सबसे बड़ी कूटनीतिक और सैन्य हार होगी।

रक्षा प्रणालियों का कड़ा इम्तिहान

ईरान ने जिस तकनीक का इस्तेमाल किया है, वो चिंताजनक है। वो सिर्फ पुरानी मिसाइलें नहीं दाग रहा। अब उसके पास ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जो पलक झपकते ही रास्ता बदल सकती हैं। इसे रोकने के लिए अमेरिका ने अपनी 'एजिस' (Aegis) बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रणाली को एक्टिवेट कर दिया है। ये सिस्टम रडार के जरिए दुश्मन की मिसाइल को ट्रैक करता है और हवा में ही उसे नष्ट कर देता है। लेकिन क्या ये शत-प्रतिशत सुरक्षित है? नहीं। युद्ध में कुछ भी निश्चित नहीं होता।

पेंटागन की सबसे बड़ी चिंता 'सैचुरेशन अटैक' को लेकर है। इसका मतलब है कि दुश्मन एक साथ इतनी मिसाइलें दागे कि डिफेंस सिस्टम कंफ्यूज हो जाए। ईरान इसी रणनीति पर काम कर रहा है। वो ड्रोन और मिसाइलों का मिला-जुला हमला करता है। ड्रोन रडार को व्यस्त रखते हैं और मिसाइलें अपने टारगेट की तरफ निकल जाती हैं। अमेरिकी एक्सपर्ट्स जानते हैं कि ये खेल बहुत खतरनाक है। इसलिए उन्होंने सायबर सुरक्षा को भी मजबूत किया है ताकि ईरान के कमांड सेंटर को ही जाम किया जा सके।

इजरायल और अमेरिका का मजबूत गठबंधन

इस पूरे मामले में इजरायल की भूमिका सबसे अहम है। अमेरिका उसे हर तरह की खुफिया जानकारी और सैन्य मदद दे रहा है। दोनों देशों के बीच रेड हॉटलाइन 24 घंटे खुली है। जब ईरान की मिसाइलें लॉन्च हुईं, तो इजरायल का 'एरो' डिफेंस सिस्टम सबसे पहले हरकत में आया। अमेरिकी रडार ने उसे डेटा दिया और इजरायली इंटरसेप्टर ने मिसाइलों को गिराना शुरू किया। ये आपसी तालमेल ही है जो अब तक किसी बड़ी तबाही को रोक पाया है।

ईरान का दावा है कि उसके हमले सफल रहे। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। अधिकतर मिसाइलों को आबादी वाले इलाकों से दूर ही मार गिराया गया। फिर भी, अमेरिका इसे हल्के में नहीं ले रहा। रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका अपने सैनिकों और सहयोगियों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। ये 'किसी भी हद' वाली बात ईरान के लिए सीधी चेतावनी है। इसका मतलब सीधा सैन्य हमला भी हो सकता है।

मिडिल ईस्ट में बदलता पावर गेम

ये लड़ाई सिर्फ जमीन के एक टुकड़े की नहीं है। ये प्रभुत्व की है। ईरान खुद को मुस्लिम जगत का नेता दिखाना चाहता है। वहीं अमेरिका चाहता है कि तेल की सप्लाई और उसके व्यापारिक मार्ग सुरक्षित रहें। अगर ये तनाव बढ़ता है, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर जाएगी। कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। आप और हम अपनी जेब पर इसका सीधा असर देखेंगे।

अमेरिका के अलर्ट होने का एक और कारण है। उसे डर है कि ईरान के साथ-साथ उसके समर्थित गुट, जैसे हिजबुल्लाह और हूती विद्रोही भी सक्रिय हो जाएंगे। अगर ये सब मिलकर हमला करते हैं, तो अमेरिका को कई मोर्चों पर एक साथ लड़ना पड़ेगा। ये किसी भी सुपरपावर के लिए बुरा सपना हो सकता है। इसीलिए पेंटागन अब क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर एक 'एयर डिफेंस नेटवर्क' बनाने की कोशिश में है। इसमें सऊदी अरब और यूएई जैसे देश भी शामिल हो सकते हैं, भले ही वो खुलकर सामने न आएं।

क्या कूटनीति का रास्ता बंद हो चुका है?

अभी तो ऐसा ही लगता है। जब मिसाइलें बात करती हैं, तो शब्द अपनी कीमत खो देते हैं। ईरान कहता है कि वो अपनी संप्रभुता की रक्षा कर रहा है। अमेरिका कहता है कि वो आतंक को रोक रहा है। दोनों पक्षों के तर्क अपनी-अपनी जगह मजबूत हैं। लेकिन असलियत में पिस रही है आम जनता। ईरान की जनता पर प्रतिबंधों का बोझ है, तो दूसरी तरफ युद्ध का साया। अमेरिका में भी लोग पूछ रहे हैं कि क्या एक और विदेशी युद्ध में शामिल होना सही है?

पेंटागन ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है, लेकिन युद्ध अंतिम विकल्प होना चाहिए। अभी के हालात को देखकर लगता है कि अमेरिका 'सेंसिटिव' मोड में है। वो ईरान को उकसाना नहीं चाहता, लेकिन अपनी कमजोरी भी नहीं दिखाना चाहता। ये एक बहुत ही नाजुक संतुलन है। एक छोटी सी गलती और पूरा क्षेत्र धमाकों से गूंज उठेगा।

आपको क्या नजर रखना चाहिए

आने वाले दिनों में कुछ चीजें बहुत अहम होने वाली हैं। सबसे पहले, क्या अमेरिका ईरान के भीतर स्ट्राइक करेगा? अगर ऐसा होता है, तो जंग का दायरा बढ़ जाएगा। दूसरा, ईरान की अगली चाल क्या होगी? क्या वो अपने परमाणु कार्यक्रम को तेज करेगा? ये वो सवाल हैं जो पूरी दुनिया को डरा रहे हैं।

ईरान के मिसाइल लॉन्च के बाद अमेरिका की ये चौकसी दिखाती है कि मामला गंभीर है। पेंटागन की तैयारी सिर्फ बचाव की नहीं, बल्कि पलटवार की भी है। आपको वैश्विक समाचारों और तेल की कीमतों पर नजर रखनी चाहिए। ये तनाव सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहने वाला। इसकी आंच हर घर तक पहुंचेगी।

अगर आप मिडिल ईस्ट की राजनीति को करीब से देख रहे हैं, तो इन अपडेट्स को नजरअंदाज मत कीजिए। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अब गेंद पूरी तरह से ईरान के पाले में है। या तो वो पीछे हट जाए या फिर अमेरिकी सैन्य शक्ति के भीषण प्रहार का सामना करे। शांति की उम्मीद अभी धुंधली है, लेकिन कोशिशें जारी रहनी चाहिए। इस बिगड़ते हालात में सतर्क रहना ही एकमात्र रास्ता है।

BM

Bella Mitchell

Bella Mitchell has built a reputation for clear, engaging writing that transforms complex subjects into stories readers can connect with and understand.