फिलीपींस एक बार फिर दहल उठा है। धरती हिली और देखते ही देखते कई हंसते-खेलते परिवार मलबे के नीचे दफन हो गए। फिलीपींस में आए इस तेज भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है, जबकि 134 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मलबे को हटाने का काम जारी है और आशंका है कि ये आंकड़े अभी और बढ़ सकते हैं। कई इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह चुकी हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें और वीडियो दिल दहला देने वाले हैं।
लोग अक्सर ऐसी घटनाओं को सिर्फ एक हेडलाइन की तरह पढ़ते हैं और आगे बढ़ जाते हैं। पर हमें यह समझना होगा कि प्रशांत महासागर का यह पूरा हिस्सा कितना खतरनाक है। फिलीपींस पैसिफिक 'रिंग ऑफ फायर' पर स्थित है। इसका मतलब है कि वहां भूकंप आना कोई नई या हैरान करने वाली बात नहीं है। हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी चेतावनियों के बाद भी जान-माल का इतना नुकसान क्यों होता है। क्या हमारी इमारतें इस लायक नहीं बनीं कि वो इन झटकों को झेल सकें?
आपदा की पूरी कहानी और जमीनी हकीकत
भूकंप का झटका इतना तेज था कि लोग संभल भी नहीं पाए। जैसे ही धरती कांपी, बहुमंजिला इमारतें डगमगाने लगीं। अस्पतालों, स्कूलों और रिहायशी इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 32 लोगों की जान जा चुकी है। अस्पतालों में भर्ती 134 घायलों में से कई की हालत नाजुक बनी हुई है। स्थानीय प्रशासन और बचाव दल मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।
फिलीपींस के ज्वालामुखी और भूकंप विज्ञान संस्थान (Phivolcs) ने इस झटके की तीव्रता को काफी खतरनाक श्रेणी में रखा है। झटके के बाद कई आफ्टरशॉक्स भी दर्ज किए गए, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है। लोग अपने घरों में जाने से डर रहे हैं। वो खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हैं। बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। बिजली की लाइनें टूट गई हैं और कई इलाकों में पानी की सप्लाई ठप है।
रिंग ऑफ फायर का असली खतरा क्या है
भूवैज्ञानिक रूप से फिलीपींस की स्थिति को समझना बहुत जरूरी है। यह देश पैसिफिक रिंग ऑफ फायर के किनारे बसा है। यह दुनिया का सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र है। दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत भूकंप इसी क्षेत्र में आते हैं।
यहां धरती के नीचे टेक्टोनिक प्लेट्स लगातार आपस में टकराती रहती हैं। जब इन प्लेट्स के बीच का तनाव हद से ज्यादा बढ़ जाता है, तो वो अचानक ऊर्जा छोड़ती हैं। इसी ऊर्जा के रिलीज होने से सतह पर भूकंप आता है। फिलीपींस के नीचे कई एक्टिव फॉल्ट लाइन्स हैं। इसलिए वहां के लोगों के लिए भूकंप कोई अचानक आई आफत नहीं, बल्कि एक कड़वी सच्चाई है जिसके साथ उन्हें जीना पड़ता है।
इमारतें क्यों बनीं मौत का कुआं
इस आपदा में सबसे ज्यादा नुकसान कमजोर निर्माण कार्य की वजह से हुआ है। जो इमारतें गिरी हैं, उनमें से ज्यादातर ने तय मानकों का पालन नहीं किया था। यह सिर्फ फिलीपींस की समस्या नहीं है। पूरी दुनिया के विकासशील देशों में यही हाल है। लोग पैसे बचाने के चक्कर में कंस्ट्रक्शन की क्वालिटी से समझौता कर लेते हैं।
भूकंप कभी खुद किसी की जान नहीं लेता। जान हमेशा घटिया निर्माण और गिरती हुई दीवारें लेती हैं। जब तक हम भूकंप-रोधी (earthquake-resistant) तकनीक को अनिवार्य नहीं करेंगे, तब तक ऐसे हादसों को रोक पाना मुमकिन नहीं है। कंक्रीट के ढांचे को मजबूत बनाने के लिए सही मात्रा में स्टील और सही डिजाइन का होना बेहद जरूरी है।
खुद को सुरक्षित रखने के व्यावहारिक तरीके
भूकंप आने पर सबसे जरूरी है कि आप पैनिक न करें। घबराहट में लोग अक्सर गलत फैसले ले लेते हैं। अगर आप किसी इमारत के अंदर हैं, तो तुरंत 'ड्रॉप, कवर और होल्ड ऑन' के नियम का पालन करें।
- फर्श पर बैठ जाएं ताकि झटके से आप गिर न जाएं।
- किसी मजबूत मेज या डेस्क के नीचे छिप जाएं ताकि सिर पर मलबा न गिरे।
- अगर आसपास कोई मेज न हो, तो अपने चेहरे और सिर को अपनी बाहों से ढक लें और कमरे के किसी अंदरूनी कोने में बैठ जाएं।
- लिफ्ट का इस्तेमाल भूलकर भी न करें। सीढ़ियों से नीचे उतरें, लेकिन तभी जब झटका रुक चुका हो।
- अगर आप घर से बाहर हैं, तो इमारतों, पेड़ों, स्ट्रीट लाइटों और बिजली के तारों से दूर किसी खुली जगह पर चले जाएं।
हर परिवार के पास एक इमरजेंसी किट तैयार होनी चाहिए। इसमें कुछ दिनों का साफ पानी, डिब्बाबंद खाना, एक फर्स्ट-एड बॉक्स, टॉर्च और जरूरी दवाइयां शामिल होनी चाहिए। यह छोटी सी तैयारी किसी भी बड़ी आपदा के वक्त आपकी और आपके परिवार की जान बचा सकती है। प्रशासन को भी चाहिए कि वो समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित करे ताकि आम जनता को पता हो कि संकट के समय उन्हें क्या कदम उठाने हैं। अब समय सिर्फ शोक मनाने का नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा नीतियों को मजबूत करने का है।