दक्षिण कोरिया की राजनीति इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। हान सियोंग-सुक देश की नई प्रधानमंत्री बनने की रेस में सबसे आगे चल रही हैं। अगर वे इस पद को संभालती हैं, तो यह दक्षिण कोरिया के इतिहास में लगभग दो दशक बाद होगा जब कोई महिला इस कुर्सी पर बैठेगी। यह सिर्फ एक राजनीतिक नियुक्ति नहीं है। यह उस देश के लिए बहुत बड़ी बात है जो रूढ़िवादी राजनीतिक ढांचे के लिए जाना जाता है।
ज्यादातर लोग इस खबर को सिर्फ एक हेडलाइन की तरह देख रहे हैं। लेकिन इसके पीछे की कहानी और इसके राजनीतिक मायने बहुत गहरे हैं। दक्षिण कोरिया में लैंगिक समानता और राजनीतिक भागीदारी को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। ऐसे में हान सियोंग-सुक का इस मुकाम तक पहुंचना कई पुरानी परंपराओं को तोड़ता है।
हान सियोंग सुक कौन हैं और उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा
हान सियोंग-सुक कोई नया नाम नहीं हैं। उन्होंने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों को संभाला है। उनकी पहचान एक सख्त और नीति-संचालित नेता के रूप में होती है। दक्षिण कोरियाई राजनीति पर नजर रखने वाले जानते हैं कि उनका ट्रैक रिकॉर्ड काफी मजबूत रहा है। उन्होंने देश के आर्थिक और सामाजिक सुधारों में सक्रिय भूमिका निभाई है।
दक्षिण कोरिया में प्रधानमंत्री का पद राष्ट्रपति के बाद दूसरा सबसे बड़ा प्रशासनिक पद होता है। हालांकि मुख्य शक्तियां राष्ट्रपति के पास होती हैं, लेकिन प्रधानमंत्री कैबिनेट को चलाने और घरेलू नीतियों को लागू करने में मुख्य भूमिका निभाता है। हान सियोंग-सुक की प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए ही उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए चुना जा रहा है।
दो दशक बाद पहली महिला प्रधानमंत्री का क्या मतलब है
इससे पहले साल 2006 में हान म्युंग-सूक दक्षिण कोरिया की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं। उसके बाद से अब तक यानी लगभग बीस साल तक किसी महिला को इस पद के लिए नहीं चुना गया। यह स्थिति तब है जब दक्षिण कोरिया एक विकसित और तकनीकी रूप से बेहद उन्नत देश है।
इस नियुक्ति के कई मायने हैं।
- राजनीतिक संतुलन: देश के भीतर महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर जो असंतोष था, उसे कम करने की कोशिश है।
- नीतिगत बदलाव: हान सियोंग-सुक का झुकाव सामाजिक कल्याण और कार्यस्थल पर समानता जैसे मुद्दों की तरफ रहा है। उम्मीद है कि उनके आने से इन नीतियों को रफ्तार मिलेगी।
- अंतरराष्ट्रीय छवि: वैश्विक स्तर पर दक्षिण कोरिया की छवि को इससे मजबूती मिलेगी, खासकर तब जब बात लैंगिक समानता सूचकांक की आती है।
सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला केवल प्रतीकात्मक नहीं है। देश इस समय आर्थिक सुस्ती और गिरती जन्मदर जैसे गंभीर संकटों से जूझ रहा है। इन समस्याओं से निपटने के लिए एक अनुभवी प्रशासनिक हाथ की जरूरत थी, जो हान सियोंग-सुक के पास है।
नई सरकार के सामने चुनौतियां और हान की रणनीति
पद संभालते ही उनके सामने कांटों का ताज होगा। दक्षिण कोरिया इस समय कई आंतरिक मोर्चों पर संघर्ष कर रहा है। सबसे बड़ी समस्या वहां की वर्क कल्चर और युवाओं में बढ़ती निराशा है। महंगाई और घर खरीदने की बढ़ती लागत ने युवाओं को परेशान कर रखा है।
हान सियोंग-सुक को अपनी नीतियों के जरिए यह साबित करना होगा कि वे सिर्फ एक ऐतिहासिक चेहरा नहीं हैं, बल्कि एक संकटमोचक भी हैं। उन्हें संसद में विपक्ष के साथ भी तालमेल बिठाना होगा, जो इस समय काफी हमलावर रुख अपनाए हुए है। उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कितनी जल्दी कैबिनेट को अपने विजन के साथ जोड़ पाती हैं।
यदि आप अंतरराष्ट्रीय राजनीति और पूर्वी एशिया के घटनाक्रमों पर नजर रखते हैं, तो आपको आने वाले हफ्तों में दक्षिण कोरियाई संसद की कार्यवाही को करीब से देखना चाहिए। हान सियोंग-सुक की नियुक्ति की आधिकारिक पुष्टि और उनकी पहली नीतिगत घोषणाएं यह साफ कर देंगी कि दक्षिण कोरिया का अगला दशक किस दिशा में जाने वाला है। इस राजनीतिक बदलाव के हर अपडेट पर नजर बनाए रखें क्योंकि यह एशियाई महाद्वीप की राजनीति को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।